नोएडा – ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बिल्डरों पर बकाया 55 हजार करोड़ के वसूली का रास्ता साफ

टेन न्यूज नेटवर्क

नई दिल्ली (8 नवंबर 2022): धन संकट से जूझ रहे नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। SC ने बिल्डरों पर दोनो प्राधिकरणों के बकाया 55 हजार करोड़ को वसूलने का रास्ता साफ कर दिया है।

ज्ञात हो कि कोर्ट ने करीब 1 वर्ष पहले मामले की सुनवाई कर फैसला को सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा फैसला सुनाया गया और रिव्यू पिटिशन में प्राधिकरण द्वारा SC में प्रस्तुत बिंदुओ को सही ठहराया गया। इस फैसले के बाद उन 225 बिल्डरों के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है जो प्राधिकरणों के भारी भरकम रकम दबा बैठे थे। लीज डीड शर्त में शामिल 11.5 प्रतिशत ब्याज, 1 प्रतिशत प्रशासनिक ब्याज और 3 प्रतिशत पेनल्टी ब्याज के साथ बकाया राशि वसूलने का नियम है।

बता दें कि 25 अगस्त 2020 को उच्चतम न्यायालय ने SBI के मार्जिनल कास्ट ऑफ फंड बेस्ड लैंडिंग रेट के हिसाब से बिल्डरों से बकाया राशि वसूलने का आदेश जारी किया था। जिसके बाद प्राधिकरणों के द्वारा 26 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटिशन दायर की गई थी। न्यायालय ने एक साल पहले 13 नवंबर 2021 को मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को न्यायालय द्वारा यह फैसला सुनाया गया, जिसमें नोएडा प्राधिकरण की रिव्यू याचिका के सभी बिंदुओं को सही ठहराया और अपने ही आदेश को पलट दिया।

आपको बता दें कि इस फैसले के बाद नोएडा के 90 डिफॉल्टर बिल्डरों से 40 हजार करोड़ और ग्रेटर नोएडा के 135 डिफॉल्टर बिल्डरों से 15 हजार रुपए की वसूली होगी।

पूरा मामला यह था कि वर्ष 2006 में नोएडा भू आवंटन नीति के तहत ग्रुप हाउसिंग में कुल लैंड की लागत का 10फीसदी जमा करने के बाद ही भूखंड आवंटित कर दिया जाता था। बाकि पैसे किस्तों में जमा करनी होती थी। बाकि पैसे 6-6 महीने पर देकर 8 सालों में जमा करना होता था जो कि बिल्डरों ने नहीं किया, जिस वजह से 50 हजार फ्लैट खरीदारों की रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी।।