पंजाबी भाषा को बचाने के लिए दिल्ली कमेटी ह ाईकोर्ट पहुंची

*कोर्ट ने दिल्ली सरकार, पंजाबी अकादमी, उर्दु अकादमी, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं सी.बी.एस.ई. को नोटिस किया जारी*

*मामला तीन भाषा फार्मूले की अनदेखी का*

नई दिल्ली (8 अगस्त 2017)ः दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पंजाबी भाषा के साथ किये जा रहे सौतेले व्यवहार पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रूख अपना लिया है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. द्वारा पंजाबी भाषा की बदहाली के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका पर आज सुनवाई करते हुए कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल एवं जस्टिस सी. हरिशंकर की पीठ ने दिल्ली सरकार, पंजाबी अकादमी, उर्दु अकादमी, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं सी.बी.एस.ई. को नोटिस जारी कर दिया है।

दरअसल दिल्ली में पंजाबी भाषा को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। जिसके चलते दिल्ली स्कूल शिक्षा नियम 1973 की धारा 9 के मुताबिक तीन भाषा फार्मूले के तहत सरकारी स्कूलों में पंजाबी भाषा को पढ़ाना जरूरी है। परन्तु दिल्ली सरकार द्वारा कुछ स्कूलों में व्यवासायिक कोर्सो को लागू करने तथा पंजाबी अध्यापकों की स्थायी भर्ती से किनारा करने को तीन भाषा फार्मूले की उल्लंघना करार देते हुए दिल्ली कमेटी ने हाईकोर्ट का रूख किया है। सुनवाई दौरान हाईकोर्ट ने इससे पहले कोर्ट में चल रहे संस्कृत अध्यापकों के केस के साथ उक्त केस को नत्थी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 14 सितम्बर 2017 को करने के आदेश दिये है।

इस बारे में जानकारी देते हुए जी.के. ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार लगातार पंजाबी भाषा के अध्यापकों तथा विद्यार्थियों को परेशान करने पर लगी हुई है। दिल्ली में पंजाबी भाषा पढ़ाना जरूरी होने के बावजूद स्कूलों से पंजाबी भाषा को बाहर निकालने की साजिश रची जा रही है। जी.के. ने जानकारी दी कि दिल्ली कमेटी इस लड़ाई को कानूनी विभाग प्रमुख जसविन्दर सिंह जौली की मार्फत राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान आयोग में लंबे समय से लड़ रही है। ए.एस. बराड़ द्वारा दर्ज किये गये उक्त केस में आयोग के आदेश पर दिल्ली कमेटी ने सरकारी स्कूलों में पंजाबी तथा उर्दु अध्यापकों की जरूरत का पता लगाने के लिए सर्वे भी किया था।

जी.के. ने बताया कि सर्वे के बाद 600 से अधिक पंजाबी अध्यापकों के रिक्त पदों को भरने का दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग ने आयोग को भरोसा दिया था परन्तु पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली सरकार ने पंजाबियों के साथ झूठी हमदर्दी जताते हुए अखबारी इश्तिहारों के जरिये पंजाबी मां-बोली का रहबर होने का स्वांग रचते हुए पंजाबियों के साथ धोखा किया था। जी.के. ने कहा कि भर्ती के अवसरों को घटाने के लिए अतिथि टीचरों की भर्ती के लिए सी.टी.ई. टेस्ट पास करना जरूरी कर दिया था। जोकि भर्ती नियमों के साथ ओछा मजाक था। जिस करके पंजाबी टीचर बनने के दावेदार बड़ी संख्या में सामने नहीं आ पाये थे। जी.के. ने पंजाबी भाषा के सम्मान की बहाली तक लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया।

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