राम मंदिर से जुड़ी अद्भुत एवं दिव्य बातें, पढ़कर चौंक जाएंगे आप!

टेन न्यूज नेटवर्क

दिल्ली (12 जनवरी 2024): राम मंदिर बनने का लगभग 500 वर्षों से देश के सभी सनातनी इंतजार कर रहे थे। इतने लंबे इंतजार के बाद आगामी 22 जनवरी 2024 को ‘राम की नगरी’ अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा होने जा रहा है, प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा भी की जाएगी। बता दें कि अयोध्या में बन रहे राम मंदिर एक हिंदू मंदिर है जो कि हिंदू धर्म के आराध्य देव प्रभु श्री राम की जन्मभूमि है।

राम मंदिर से जुड़ी खास और हैरान करने वाली बातें

बता दें कि राम मंदिर को बनाने के लिए 2587 पवित्र स्थान से मिट्टी ली गई है। जिसमें यमुनोत्री, हल्दीघाटी झांसी का किला, कानपुर के सती चौड़ा एवं नरसंहार घाट, शिवाजी का किला और शहीद चंद्रशेखर की भूमि, स्वर्ण मंदिर, बंगाल, केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगा जैसे पवित्र स्थान हैं। मेघालय में सिंटू, केसर, जोबाई और नृत्यांग, कामाख्या मंदिर, रामेश्वरम में अग्नि सिद्धांत और साथ ही आगरा में बटेश्वर गांव में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेई के पैतृक घर से मिट्टी एकत्र की गई है।

राम मंदिर की नींव रखने में 150 नदी के पवित्र जल का उपयोग किया गया है। जिसे दो भाइयों राधेश्याम पांडे और शाबाद वैज्ञानिक महाकवि त्रिफला द्वारा एकत्र किया गया । संग्रह में आठ नदियों, तीन समुद्री और श्रीलंका के 16 स्थान से पवित्र जल है। इसके अतिरिक्त मानसरोवर के पवित्र जल को लाया गया है। मेघालय के जयंतियां हिल्स, मेंडू और मेंताग में भी दो नदियों से पानी एकत्र किया गया है।

मंदिर के नीचे 2000 फीट की दूरी पर टाइम्स कैप्सूल रखा गया है। इस टाइम्स कैप्सूल का मकसद यह है कि सालों बाद भी यदि कोई श्री राम जन्मभूमि के बारे में जानना चाहे तो वह इससे जान सकता है। कैप्सूल में राम जन्मभूमि अयोध्या और भगवान राम से संबंधित तथ्य होंगे।

मंदिर के लिए विशेष श्री राम ईंटें तमिलनाडु के साधु सोने और चांदी से बने दो ईट लेकर आए हैं जिन पर तमिल भाषा में श्री राम लिखा हुआ है। सोने चांदी के इन ईंटों को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को दान किया गया। जिनका उपयोग मंदिर निर्माण के लिए किया गया है। अयोध्या में शिलान्यास होने से पहले 1979 में देश भर के भक्तों से रामशिला नमक इन ईंटों को एकत्र किया गया था।

राम मंदिर के निर्माण में सोने और चांदी की ईंटों का भी प्रयोग किया गया है। राम मंदिर के निर्माण के लिए लोहे और स्टील का प्रयोग नहीं किया जाएगा इसके निर्माण के लिए केवल सफेद सीमेंट तांबा और पत्थरों का प्रयोग किया जाएगा।

मंदिर निर्माण के लिए पूरे भारत से सोने और चांदी की ईंटों का दान राम मंदिर ट्रस्ट को किया गया है इस कार्य के लिए सेलिब्रिटी से लेकर राजनेताओं तक सभी का योगदान रहा है मंदिर के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश बुलियन एसोसिएशन ने 33 किलोग्राम से अधिक वजन की चांदी की ईट दान में दी है।

यह थी राम मंदिर से जुड़ी खास और बातें। आशा है आपको ये बातें पसंद आई होगी। राम मंदिर को लेकर आप अपने श्रद्धा एवं अनुभव कॉमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।