मनीष सिसोदिया ने एलजी को लिखा पत्र, मोहल्ला क्लिनिक को ठप्प करने का लगाया आरोप

टेन न्यूज़ नेटवर्क

नई दिल्ली (16/01/2023): दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली के उपराज्यपाल विनय सक्सेना को रविवार को मोहल्ला क्लीनिक व्यवस्था को ठप्प करने की साज़िश के ख़िलाफ़ पत्र लिखा है। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने पत्र में आरोप लगाते हुए कहा कि एमसीडी चुनाव से ठीक दो महीने पहले यानी अक्टूबर और नवंबर के महीने में दिल्ली सरकार में बैठे कुछ अफसरों ने जानबूझकर फाइलों को इस तरह घुमाया कि मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर्स की सैलरी नहीं दी जा सके। साथ ही उपमुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल से आग्रह किया है कि दोषी अधिकारियों को चिह्नित करके उन्हें तुरंत सस्पेंड करें और उनके खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाये। उन्होंने उपराज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि नहीं तो ये साबित हो जायेगा कि आपने “सर्विसेज की शक्तिओं का दुरुपयोग करके दिल्ली के लोगों को चुनावी फायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया।”

उन्होंने पत्र में लिखा है, “दिल्ली में एमसीडी चुनाव से ठीक पहले दिल्ली की जनता को परेशान करने का एक गहरा षडयंत्र रचा गया। आप जानते हैं कि दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई मोहल्ला क्लीनिक में हर महीने करीब 15 लाख लोग अपना इलाज कराने आते हैं। मोहल्ला क्लीनिक में, एमबीबीएस डॉक्टर्स द्वारा लोगों का इलाज किया जाता है, उनके टेस्ट फ्री कराए जाते हैं, और उन्हें फ्री दवाइयां दी जाती है। मोहल्ला क्लीनिक दिल्ली के कोने कोने में बने हैं इसलिए लोग अपने आसपास के मोहल्ला क्लीनिक में बहुत आसानी से पहुंच जाते हैं, एमसीडी चुनाव से ठीक पहले मोहल्ला क्लीनिक की इस पूरी व्यवस्था को ठप्प करने की साजिश रची गई।”

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “दिल्ली सरकार में बैठे कुछ अफसरों ने जानबूझकर फाइलों को कुछ इस तरह से घुमाया कि एमसीडी चुनाव से ठीक दो महीने पहले यानी अक्टूबर और नवंबर के महीने में मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर्स की सैलरी नहीं दी गई मोहल्ला क्लीनिक में होने वाले सभी टेस्ट रोक दिए गए ताकि अगर सैलरी ना मिलने के बावजूद डॉक्टर्स मोहल्ला क्लीनिक में आएं और लोगों का इलाज भी करना चाहें तो बीमारी के इलाज के लिए जरूरी टेस्ट ना हो पाए। इतना ही नहीं मोहल्ला क्लीनिक के बिजली के बिल भी रोक दिए गए और जो मोहल्ला क्लिनिक किराए के भवनों में चल रही हैं उनका किराया भी नहीं जमा होने दिया गया‌। यह सब इसलिए किया गया ताकि जनता परेशान हो और हमारी सरकार से नाराज हो, सैलरी न मिलने से डॉक्टर्स परेशान हो और वह भी सरकार से नाराज हो और जनता को नाराज करें।”

उन्होंने कहा कि “स्वास्थ्य विभाग और वित्त विभाग के अधिकारी लगातार कोई ना कोई बहाना बनाकर फाइलें इधर से उधर घुमाते रहे, फाइलों को नए नए सवाल पूछ कर इधर-उधर घुमाते हुए, चुनाव के पहले के ठीक दो महीने का समय बिना किसी भुगतान के निकाल दिया गया। मैंने जब अधिकारियों इस बारे में बात की तो आधिकारिक रूप से तो वह कुछ-कुछ तकनीकी वजह बताते रहे लेकिन दबी जबान में यह भी बताते रहे हैं कि एलजी साहब की तरफ से सख्त निर्देश थे कि MCD चुनाव के पहले पेमेंट नहीं करने, नहीं तो सस्पेंड कर दिये जाओगे। चूँकि “सर्विसेज” आपके पास है, इसलिए सभी अफ़सर आप से डरते हैं।”

उन्होंने कहा कि “मोहल्ला क्लीनिक की व्यवस्था दिल्ली में सात साल से शानदार तरीके से चल रही है। कभी इस तरह की दिक्कत सामने नहीं आई। हमेशा इसी व्यवस्था के तहत डॉक्टर्स को सैलरी मिलती रही है, आम जनता के टेस्ट होते रहे हैं। इसमें दिलचस्प बात यह भी है कि चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद दिसंबर के महीने में सारी ऑब्जेक्शन अचानक दूर हो गयी और सभी पेमेंट कर दी गयीं। ऐसा कैसे हो गया? इसी से साफ हो जाता है कि चुनाव से ठीक दो महीने पहले मोहल्ला क्लिनिक से संबंधित सैलरी और अन्य पेमेंट रोक कर रखना एक बहुत बड़ी साजिश का हिस्सा था।”

उपमुख्यमंत्री ने उपराज्यपाल से आग्रह करते हुए कहा कि “इस पूरी साजिश के पीछे जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए। अगर आप उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही नहीं करते हैं तो लोग कहेंगे कि अधिकारी आप के इशारे पर ही चुनाव से ठीक पहले यह षड्यंत्र रच रहे थे। षड्यंत्र को छुपाने के लिए और अपनी जवाबदेही से बचने के लिए अधिकारी कोई ना कोई कहानी जरूर सुनाएंगे। लेकिन उनसे जरूर पूछा जाना चाहिए कि सात साल से जिस व्यवस्था के तहत मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर्स की सैलरी मिलती रही और जिस व्यवस्था के तहत आम जनता के टेस्ट होते रहे, चुनाव से ठीक दो महीने पहले फाइलों को घुमाने के लिए उस पर तरह-तरह के बहाने क्यों लगाए गए? अगर किसी अधिकारी की नजर में सवाल ये भी तो भी लोगों का इलाज कैसे रोका जा सकता है? डॉक्टर्स की सैलरी कैसे रोकी जा सकती है?”

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “दिल्ली के लोगों का इलाज रोकना एक आपराधिक कृत्य है, जनता ने जिस सरकार को चुन कर भेजा है, उसके खिलाफ सरकार में बैठे अधिकारी अगर षड्यंत्र करेंगे तो यह देशद्रोह है। अगर अधिकारियों से यह साजिश आपके द्वारा कराई गई है तो यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उपराज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता कि वह चुनावी उद्देश्यों के लिए जनता की चुनी हुई सरकार के खिलाफ इस तरह की साजिश करें और अगर कुछ अधिकारियों ने अपने स्तर पर यह षड्यंत्र किया है तो निश्चित ही आपको उनके ऊपर सख्त एक्शन लेते हुए यह संदेश देना चाहिए कि आप संविधान में विश्वास रखते हैं और इस तरह की किसी हरकत को बर्दाश्त नहीं करते।”