New Delhi Latest News

Amritsar AA GAYA PLAY – free entry

*आज सायं 6:30 बजे*
भीष्म साहनी की कहानियो पर आधारित नाटक *अमृतसर आ गया*
मुक्तधारा आडिटोरियम, गोल मार्केट,नई दिल्ली।
प्रवेश निशुल्क।
सहनिर्देशक- शिल्पी मारवाह

https://t.co/WiI8dZbaS7

FILM ACTOR OMPURI DIED

फिल्म अभिनेता ओमपुरी का दिल का दौरा पड़ने से निधन

66 साल के थे ओमपुरी , फिल्म जगत में शोक की लहर ओम पुरी
ओम पुरी हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। इनका जन्म १८ अक्टूबर 1950 में अम्बाला नगर में हुआ। इन्होने ब्रिटिश तथा अमेरिकी सिनेमा में भी योगदान किया है। ये पद्मश्री पुरस्कार विजेता भी हैं, जोकि भारत के नागरिक पुरस्कारों के पदानुक्रम में चौथा पुरस्कार है।

ओम पुरी का जन्म १८ अक्टूबर 1950 में हरियाणा के अम्बाला शहर में हुआ।उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की। 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा दी। बाद में ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप "मजमा" की स्थापना की।
ओम पुरी ने अपने फ़िल्मी सफर की शुरुआत मराठी नाटक पर आधारित फिल्म ‘घासीराम कोतवाल’ से की थी।वर्ष 1980 में रिलीज फिल्म "आक्रोश" ओम पुरी के सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई।

LAKHIMPUR VIKAS SEMINAR

लखीमपुर संस्कृति, प्राचीन धरोहर, शिक्षा, रोजगार विकास विषयक संगोष्ठी दिल्ली में 7 जनवरी को क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े जिले की संस्कृति व सांस्कृतिक धरोहरों को अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाने को लेकर राष्ट्रीय राजधानी परिक्षेत्र में रह रहे लखीमपुर के युवाओं ने दिल्ली में आगामी 7 जनवरी को एक संगोष्ठी का आयोजन किया है।जिले के विकास के मंसूबे से आयोजित हो रही उक्त संगोष्ठी में प्रमुख रूप से समाजवादी पार्टी के सांसद रवि वर्मा, भाजपा सांसद अजय मिश्रा, पूर्व राज्यसभा सांसद जुगुल किशोर, स्किल इंडिया के डायरेक्टर जयंत कृष्णा, जे एन यू के छात्र संघ अध्यक्ष मोहित पाण्डेय, जिला अधिकारी आकाश दीप आदि को आमंत्रित किया गया है।उक्त जानकारी नोएडा से लखीमपुर निवासी विवेक श्रीवास्तव ने एक औपचारिक बातचीत के दौरान दी।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग सवा सौ किलोमीटर दूर 3680 वर्गकिलोमीटर में हरियाली की प्राकृतिक छठा बिखेरता यह जिला लखीमपुर ऐतिहासिक रूप से सूबे का सबसे महत्वपूर्ण जिला मन जाता है।यहाँ की माटी ने आजादी से अब तक देशभक्ति में योगदान दे तमाम उदहारण दिए हैं।तराई तप भूमि से जाना जाने वाला यह जिला प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहरों को आज भी सँजोये हुए है।इसके साथ साथ संगोष्ठी में शिक्षा, रोजगार जैसे विषयों को भी प्रमुखता दी जाएगी।
संगोष्ठी को सफल बनाने को लेकर लखीमपुर – दिल्ली युवाओं में प्रमुख रूप से विवेक श्रीवास्तव, हिमांशु तिवारी, मंगेश त्रिवेदी , अंकित शुक्ला, गगन मेहरोत्रा, अनुराग पाण्डेय, शेखर शुक्ला, विराग शुक्ला, रोहित बधावन आदि गत पखवारे से प्रयासरत है।लखीमपुर निवासी श्री विवेक ने दिल्ली क्षेत्र में रह रहे लखीमपुर निवासियों से अपील की है कि संगोष्ठी में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले।

LAKHIMPUR SANSKRITI SEMINAR

लखीमपुर संस्कृति, प्राचीन धरोहर, शिक्षा, रोजगार विकास विषयक संगोष्ठी दिल्ली में 7 जनवरी को

GURU GOVIND SINGH GREAT WARROR BY R K SINHA , RAJYA SABHA MP

दुनिया के इतिहास में ऐसा युद्ध न कभी किसी ने पढ़ा होगा न ही कभी किसी ने सोचा होगा, जिसमे 10 लाख की फ़ौज का सामना महज 40 लोगों के साथ हुआ था और 10 लाख की फ़ौज के सामने अन्तत जीते है वे मात्र 40 रणबाँकुरे !
चमकौर का युद्ध 1704 में 6 दिसम्बर को गुरु गोविंद सिंह और औरंगज़ेब के सेनापति वजीर खान की अगुआई में मुगलों की सेना के बीच पंजाब के चमकौर में लड़ा गया था। इस युद्ध में मुगलों की विशाल सेना के सामने मामूली सी सिख सेना थी। लेकिन सिखों ने बहुत ही वीरता से लड़ते हुए मुग़लों को भारी क्षति पहुँचाई।

भारी भरकम सेना के बावजूद मुगल सेनापति वजीर खान गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने में नाकाम रहा। लेकिन, इस युद्ध में गुरु साहब के दो पुत्रों साहिबज़ादा अजीत सिंह व साहिबज़ादा जुझार सिंह ने शहीदी प्राप्त की। गुरु गोविंद सिंह ने इस युद्ध का वर्णन "ज़फ़रनामा" में किया है। उन्होंने बताया है कि जब वे सरसा नदी को पार कर चमकौर पहुंचे, तो किस तरह मुगलों ने उन पर घातक हमला किया।

वजीर खान किसी भी सूरत में गुरु गोविंद सिंह जी को ज़िंदा या मुर्दा पकड़ने की कोशिश में आया था, क्योंकि; औरंगजेब की लाख कोशिशों के बावजूद गुरु गोविंद सिंह मुग़लों की अधीनता स्वीकार नहीं कर रहे थे। लेकिन, गुरु गोविंद सिंह के दो बेटों सहित 40 सिक्खों ने गुरूजी के आशीर्वाद और अपनी वीरता से वजीर खान को अपने मंसूबो में कामयाब नहीं होने दिया और 10 लाख मुग़ल सैनिक भी गुरु गोविंद सिंह जी को नहीं पकड़ पाए। यह युद्ध इतिहास में सिक्खों की वीरता और उनकी अपने धर्म के प्रति आस्था के लिए जाना जाता है । गुरु गोविंद सिंह ने इस युद्ध का वर्णन “जफरनामा” में करते हुए लिखा है:-
" सवा लाख से एक लडाऊं, तबै गोबिंद सिंह नाम कहाऊं।"…..आर.के.सिन्हा.सांसद राज्य सभा

LAKHIMPUR DELHI SEMINAR

लखीमपुर संस्कृति, प्राचीन धरोहर, शिक्षा, रोजगार विकास विषयक संगोष्ठी दिल्ली में 7 जनवरी को

Bharat Ka Naya Geet

*भारत का नया गीत*

*आओ बच्चों तुम्हे दिखायें,
शैतानी शैतान की… ।*
*नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की…।।*

*बड़े-बड़े नेता शामिल हैं,
घोटालों की थाली में ।*
*सूटकेश भर के चलते हैं,
अपने यहाँ दलाली में ।।*

*देश-धर्म की नहीं है चिंता,
चिन्ता निज सन्तान की ।*
*नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की…।।*

*चोर-लुटेरे भी अब देखो,
सांसद और विधायक हैं।*
*सुरा-सुन्दरी के प्रेमी ये,
सचमुच के खलनायक हैं ।।*

*भिखमंगों में गिनती कर दी,
भारत देश महान की ।*
*नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की…।।*

*जनता के आवंटित धन को,
आधा मंत्री खाते हैं ।*
*बाकी में अफसर ठेकेदार,
मिलकर मौज उड़ाते हैं ।।*

*लूट खसोट मचा रखी है,
सरकारी अनुदान की ।*
*नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की…।।*

*थर्ड क्लास अफसर बन जाता,
फर्स्ट क्लास चपरासी है,
*होशियार बच्चों के मन में,
छायी आज उदासी है।।*

*गंवार सारे मंत्री बन गये,
मेधावी आज खलासी है।*
*आओ बच्चों तुम्हें दिखायें,
शैतानी शैतान की…।।*

*नेताओं से बहुत दुखी है,
जनता हिन्दुस्तान की…।*

Academia – industry linkage


BY JAGAT SHAH

A lot of people talk about academia – industry linkage but very few practice.

He is an An example of a practice:

At the vibrant ceramics 2016, The young brigade of volunteers who were attached as ‘buddies’ to each of the 610 foreign delegate last from 25 countries, did an amazing job of handling the delegates right from airport pick up to hotel, to venue, to their car arrangement, to lunch, to dinner, on all three days, to summit hall, to exhibition visit, to shopping, to money exchange, to sight seeing, to Morbi factory visit, to problem solving, to acting as interpreters, to communications, to the walk in the riverfront and so much more.

They became real life time buddies. All delegates wrote to me that the best part of vibrant ceramics was the way the volunteers assisted the delegates with everything. Volunteers worked tirelessly for three days from 7 am to 12 midnight, always on their toes.

We also got to know about the stats of business generated and investment intentions of foreign delegates through volunteers. They also took their video interviews of experiences on their smart phones and documented it.

Jai ho to the energy & passion of our youth. They made Gujarat & India proud. We are proud to have such committed youth in our country.

And of course team Global Network of 15 members who works on vibrant ceramics rocks always !