दिमागी रुप से मृत शिशु ने साढ़े तीन साल के बच्ची को दिया जीवनदान

मुंबई| सूरत में रहने वाले माता-पिता ने ब्रेन डेड अपने 14 माह के शिशु का हृदय दान करके मुंबई की साढ़े तीन साल की बच्ची का जीवन बचाने का अनुकरणनीय उदाहरण पेश किया है. इसी के साथ इस शिशु का नाम पश्चिम भारत के सबसे छोटे दानदाता के रूप में दर्ज होने का दावा किया गया है.

मुंबई के फोर्टिस अस्पताल की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि यह छोटा बच्चा खेलते समय गिर गया था उसे तत्काल सूरत के नये सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया. इसके बाद एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन ने बच्चे के माता-पिता को उसके अंगदान करने का परामर्श दिया.

इसमें कहा गया कि बच्चे के माता-पिता की सहमति के बाद उसके गुर्दों को निकालकर अहमदाबाद के गुर्दा रोग संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र पहुंचाया गया. विज्ञप्ति के अनुसार कल उस शिशु का हृदय एक फ्लाइट के जरिये ग्रीन कारीडोर से 1:25 घंटे के समय में कुल 331.7 किमी दूर मुंबई उपनगर मुलुंड स्थित फोर्टिस अस्पताल पहुंचाया गया.

इसके बाद उसके हृदय को नवी मुंबई के कलंबोली में रहने वाली एक साढ़े तीन साल की बच्ची को प्रत्यारोपित कर दिया गया. यह बच्ची डाइलेटेड कार्डियोम्योंपेथी से पीड़ित थी. यह एक ऐसी बीमारी है, जिसमें रक्त आपूर्ति करने की हृदय की क्षमता कम होती जाती है. विज्ञप्ति में बताया गया कि यह बच्ची अगस्त 2016 से प्रतीक्षा सूची में थी.

वहीं एक अन्य घटना में सीमावर्ती रायगढ़ जिले के करजात की 45 वर्षीय एक महिला को मुंबई के जेजे अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था. इसके बाद उसके पति ने उसके महत्वपूर्ण अंगों को दान देने का निर्णय किया. और महिला के हृदय को नवी मुंबई की 38 वर्षीय एक महिला को प्रत्यारोपित किया गया.

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