PARI HO TUM GUJRAT KI ROOP TUMHARA MADRASI – BHARAT MATA KI KAVITA

"परी हो तुम गुजरात की, रूप तेरा मद्रासी !
🌿💕🌿
सुन्दरता कश्मीर की तुम में, सिक्किम जैसा शर्माती !!
. 🌿💕🌿
खान-पान पंजाबी जैसा, बंगाली जैसी बोली !
🌿💕🌿
केरल जैसी आंख तुम्हारी, है दिल तो तुम्हारा दिल्ली !!
🌿💕🌿
महाराष्ट्र तुम्हारा फ़ैशन है, तो गोवा नया जमाना !
🌿💕🌿
खुशबू हो तुम कर्नाटक की, बल तो तेरा हरियाणा !!
🌿💕🌿
सीधी-सादी उड़ीसा जैसी, एम.पी. जैसा मुस्काना !
🌿💕🌿
दुल्हन तुम राजस्थानी जैसी, त्रिपुरा जैसा इठलाना !!
🌿💕🌿
झारखंड तुम्हारा आभूषण, तो मेघालय तुम्हारी बिन्दीया है !
🌿💕🌿
सीना तुम्हारा यू.पी है तो, हिमाचल तुम्हारी निन्दिया है !!
🌿💕🌿
कानों का कुंडल छत्तीसगढ़, तो मिज़ोरम तुम्हारी पायल है
🌿💕🌿
बिहार गले का हार तुम्हारा,
तो आसाम तुम्हारा आंचल है !!
🌿💕🌿
नागालैंड- आन्ध्र दो हाथ तुम्हारे, तो ज़ुल्फ़ तुम्हारा अरुणाचल है !
🌿💕🌿
नाम तुम्हारा भारत माता,
तो पवित्र तुम्हारा उत्तरांचल है !!
🌿💕🌿
सागर है परिधान तुम्हारा,
तिल जैसे है दमन-द्वीव !
🌿💕🌿
मोहित हो जाता है सारा जग,
रहती हो तुम कितनी सजीव !!
🌿💕🌿
अंडमान और निकोबार द्वीप,
पुष्पों का गुच्छ तेरे बालों में !
🌿💕🌿
झिल-मिल, झिल-मिल से लक्षद्वीप, जो चमक रहे तेरे गालों में !!
🌿💕🌿
ताज तुम्हारा हिमालय है,
तो गंगा पखारती चरण तेरे !
🌿💕🌿
कोटि-कोटि हम भारत वासियों का,
🌿💕🌿
स्वीकारो तुम नमन मेरे !!
जय हो।
🌿💕🌿
भारत माता की जय।
🌿💕🌿💕🌿💕🌿💕🌿