पुणे में अंग्रेजों की जीत का जश्न मनाने पर हिंसा, कई गाड़ियां फूंकी, 1 की मौत

पुणे| पुणे जिले में भीमा-कोरेगांव की लड़ाई की 200 वीं सालगिरह पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सोमवार को हुई हिंसा में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई है. हिंसा में कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया. पुलिस की गाड़ियों को भी भीड़ ने फूंक दिया. कुछ लोगों ने पुलिस पर भी हमला किया. तनाव की ये आग मुंबई और महाराष्ट्र के कई इलाकों तक पहुंच गई. आज भिवंडी में प्रदर्शन हुआ और चेंबूर में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. इसके चलते मुंबई लोकल की आवाजाही पर भी असर पड़ा है.

इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. मृतक के परिजनों के लिए 10 लाख का मुआवजे का ऐलान किया गया है. पुलिस पूरी तरह अलर्ट है और सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखी जा रही है. प्रदर्शनकारी कई जगहों पर गाड़ी में तोड़फोड़ कर रहे हैं.

भीमा-कोरेगांव की लड़ाई में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना ने पेशवा की सेना को हराया था. दलित नेता इस ब्रिटिश जीत का जश्न मनाते हैं. ऐसा समझा जाता है कि तब अछूत समझे जाने वाले महार समुदाय के सैनिक ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की ओर से लड़े थे.

हालांकि, पुणे में कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने इस ‘ब्रिटिश जीत’ का जश्न मनाए जाने का विरोध किया था. पुलिस ने बताया कि जब लोग गांव में युद्ध स्मारक की ओर बढ़ रहे थे तो शिरूर तहसील स्थित भीमा कोरेगांव में पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं. एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हुई है. हिंसा तब शुरू हुई जब एक स्थानीय समूह और भीड़ के कुछ सदस्यों के बीच स्मारक की ओर जाने के दौरान किसी मुद्दे पर बहस हुई.

भीमा कोरेगांव की सुरक्षा के लिये तैनात एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि बहस के बाद पथराव शुरू हुआ. हिंसा के दौरान कुछ वाहनों और पास में स्थित एक मकान को क्षति पहुंचाई गई.

इस बीच एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने कहा, “लोग वहां 200 साल से जा रहे हैं. कभी भी ऐसा नहीं हुआ. सभी को उम्मीद थी कि 200वीं सालगिरह पर ज्यादा लोग जमा होंगे. इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत थी.”

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