Daily Archive: April 25, 2018

Supreme Court questions Centre on mandatory linking of Aadhaar with mobile

The Supreme Court on Wednesday raised questions over the government’s decision ordering mandatory seeding of mobile numbers with Aadhaar and said its earlier order on mandatory authentication of the users was used as a “tool”.

A five-judge Constitution bench headed by Chief Justice Dipak Misra, hearing a clutch of petitions challenging Aadhaar and its enabling 2016 law, said its order on a PIL filed by ‘Lokniti Foundation’ had said that mobile users needed to be verified in the interest of national security.

“In fact there was no such direction from the Supreme Court, but you took it and used it as tool to make Aadhaar mandatory for mobile users,” the bench, also comprising Justices A K Sikri, A M Khanwilkar, D Y Chandrachud and Ashok Bhushan, said.

Senior advocate Rakesh Dwivedi, appearing for the Unique Identification Authority of India (UIDAI), said the Department of Telecommunication (DoT) notification talked about re-verification of mobile numbers by using e-KYC process and the Telegraph Act gave “exclusive power to central government to decide license conditions” of service providers.

“How can you (DoT) impose condition on service recipients for seeding Aadhaar with mobile phones,” the bench said, adding that license agreements were between the government and the service providers.

संसद में निजी विधेयक के तौर पर पेश किए जाएं गे किसानों के बिल

आज अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा राजनैतिक दलों से चर्चा कर किसानों की पूर्ण कर्ज माफी विधेयक 2018 एवं किसानों की फसल के लिए सुनिश्चित लाभकारी मूल्य अधिकार बिल 2018 का अंतिम मसौदा तैयार किया गया ।

इस तरह विपक्ष की प्रमुख पार्टियां तथा एनडीए को समर्थन करने वाले कई राजनैतिक दलों ने किसान के बिलों पर आज मुहर लगा दी है

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति एवं राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की बैठक कमेटी रूम पार्लियामेंट एनेक्सी में सम्पन्न हुई । बैठक में 192 किसान संगठनों द्वारा 21 राज्यों में 10 हजार किलोमीटर की किसान मुक्ति यात्रा के बाद 20-21 नवम्बर को दिल्ली में किसान मुक्ति संसद, संसद मार्ग पर लाखों किसानों के समक्ष प्रस्तावित किसानों की पूर्ण कर्ज माफी अधिकार बिल 2018 एवं किसानों की फसल के लिए सुनिश्चित लाभकारी मूल्य अधिकार बिल 2018 पर चर्चा की गई ।
उल्लेखनीय है कि 28 मार्च 2018 को 21 राजनैतिक दलों ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति द्वारा प्रस्तुत बिलों का समर्थन किया था ।
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति एवम राजनैतिक दलों के प्रतिनिधियों की एक समिति बनाई गई थी, जिसकी बैठक आज थी ।
बैठक में बिल का अंतिम मसौदा तैयार करने के लिए क्लॉज़ बाई क्लॉज़ (सभी धाराओं) पर चर्चा हुई । दोनों पक्षों के सुझावों पर चर्चा के बाद दोनों बिलों का प्रारूप तैयार किया गया, जिसे संसद में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के प्रतिनिधि सांसदों द्वारा संसद में निजी विधेयक के तौर पर पेश किया जाएगा ।

बैठक में शरद पवार (एनसीएपी), शरद यादव,दिनेश त्रिवेदी(अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस), दीपेंद्र हुड्डा(कांग्रेस), जेपी यादव (आरजेडी), अरविंद सावंत(शिव सेना), नागेंद्र प्रधान(बीजेडी), वी विजय साई रेड्डी(वाई एस आर कांग्रेस), ए.आर राथर (जे&के नेशनल कॉन्फ्रेंस), हनन मोल्ला(सीपीआई-एम), आशुतोष(आम आदमी पार्टी), जयंत चौधरी(आरएलडी).

बैठक से पूर्व इन दलों द्वारा अपनी सहमति बिलों को लेकर दे दी गयी, जो इस प्रकार हैं टीडीपी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, एआईडीएमके, जनता दल(सेक्युलर), झारखण्ड विकास मोर्चा, सीपीआई, सीपीआई (एमएल), एसडब्लूपी, आरएसपी.
आज की बैठक में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की अधिकृत समिति जिसमें संयोजक वी एम सिंह, राजू शेट्टी, कविता कुरुंगति, किरण विस्सा,आशीष मित्तल मौजूद रहे और साथ ही कृषि एवं मूल्य आयोग के पूर्व चेयरमैन डॉ तजमुल हक़ भी मौजूद रहे ।

बुराड़ी में न्यायभूमि कार्यकर्ताओं पर चा कुओं से जानलेवा हमला

*बुराड़ी में न्यायभूमि कार्यकर्ताओं पर चाकुओं से जानलेवा हमला*

आज दिनांक 25.04.2018 को परिवहन विभाग, बुराड़ी में 50 से अधिक दलालों ने एक समूह बनाकर न्यायभूमि के कार्यकर्ताओं को घेर लिया और उनमें से कुछ ने चाकुओं से जानलेवा हमला किया. दो-तीन लोगों ने पिस्तौल दिखाकर भविष्य में बुराड़ी में कदम ना रखने की धमकी भी दी.

न्यायभूमि ने 17 अप्रैल से परिवहन विभाग, बुराड़ी के बाहर उस स्थान पर “घूस को घूँसा” मुहिम के तहत अपना कैंप लगाया हुआ है जहाँ से सभी ऑटो-टैक्सी चालकों को गुजरना होता है और जिसे दलालों ने अपना गढ़ बना रखा है. वहां संस्था के कार्यकर्ता चालकों से पर्चों और माइक-सिस्टम के द्वारा अपील करते हैं कि घूस या दलाली ना दें और किसी भी काम में मदद के लिए कार्यकर्ताओं से संपर्क करें. इस मुहिम के पहले दिन से ही दलालों और अफसरों में खासी खलबली थी और घूस के कारोबार रोज़ कमी आ रही थी.

कुछ चालकों ने आज परिवहन विभाग के एक इंस्पेक्टर R.G. सिंह के भ्रष्टाचार की शिकायत की. जब हमारे दो कार्यकर्ताओं ने लगभग साढ़े ग्यारह बजे इस शिकायत पर ‘फिटनेस’ के पॉइंट पर विडियो बनानी शुरू की तो हमें कुछ दलालों ने घेर लिया और विडियो बनाने पर ऐतराज़ जताया. जब हम नहीं रुके तो उन्होंने हमारे फ़ोन को छीन लिया और हाथापाई करने लगे. देखते देखते 50 से अधिक दलालों की भीड़ इकट्ठी हो गयी जिसकी वजह से कार्यकर्ताओं ने किसी तरह अपने फ़ोन को वापस लिया और बाहर उस तरफ भागे जहाँ संस्था के सचिव राकेश अग्रवाल अन्य कार्यकर्ताओं के साथ खड़े थे. पीछे पीछे भीड़ भी उग्रता से दौड़ी हुई आई. इस से पहले कि बाहर खड़े कार्यकर्ता कुछ समझ पाते, दलालों में से एक ने आशीष नाम के कार्यकर्ता की गर्दन पर पीछे से चाक़ू रख दिया, दूसरे ने डंडे और कुछ अन्य ने मुक्कों से हमला किया. शायद एक और चाकू का इस्तेमाल भी किया गया. अनेक आवाजें ये धमकी देती हुई सुनाई दी कि आगे से हम दिखाई दिए तो काटकर रख दिए जायेंगे.

हम फटाफट अपनी दो कारों में सवार होकर वहां से निकले. राकेश अग्रवाल ने अपनी कार से वहां के MLO राजेश मीना को फ़ोन लगाया पर उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया. दूसरी कार को सड़क के मोड़ पर नाले के पास 7-8 लोगों ने रोक लिया और उनमें से 2 ने पिस्तौल दिखाते हुए भविष्य में बुराड़ी में कदम ना रखने की चेतावनी दी. बाद में हमें ज्ञात हुआ कि चाक़ू गर्दन पर रखने वाले दलाल का नाम भाटिया है जो जहांगीरपुरी या तिमारपुर क्षेत्र से है.

वहां से निकलकर हम बुराड़ी थाने के SHO मनोज कुमार से मिले और उन्हें लिखित शिकायत दी. उन्होंने त्वरित कारवाई का भरोसा देते हुए कुछ कर्मियों को मौके पर भेजा भी परन्तु भाटिया वहां नहीं मिला. हमारे डेढ़ बजे वहां से निकलने तक भाटिया नहीं मिला था.

संलग्न विडियो व स्क्रीन-शॉट में पीली टी-शर्ट पहने भाटिया साफ़ नज़र आ रहा है. उसके साथ वर्दी में खड़ा व्यक्ति परिवहन विभाग में कांस्टेबल है पर उसने हमारी मदद की कोई कोशिश नहीं की. जिस इंस्पेक्टर R.G. सिंह की शिकायत की गयी थी, उस से तो मदद की उम्मीद करना भी बेकार था. वह भी दूसरे स्क्रीन-शॉट में सफारी सूट में दिखाई दे रहा है. उसके सामने टोपी में हमारा कार्यकर्ता अवधेश है.

इस हादसे के बावजूद हमारा हौसला और हमारी हिम्मत बरकरार है. हम और जोरशोर से इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे. भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में हम ना डरेंगे, ना थकेंगे. हम सभी समाजसेवियों और प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हैं कि आप सब लोग भी हमारा साथ एक-एक दिन के लिए भी देंगे तो हम जल्दी ही ऑटो-टैक्सी यूनिट, बुराड़ी को भ्रष्टाचार से मुक्त कर देंगे.

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*राकेश अग्रवाल*
सचिव, न्यायभूमि
# 9873222222

*अवधेश कुमार*
कार्यकर्ता, न्यायभूमि
# 8010749370

#Gorakhpur Tragedy: After spending nearly 8 months in jail, Dr Kafeel gets bail

GORAKHPUR: After spending nearly eight months in jail, Dr Kafeel Ahmed Khan was finally granted bail Allahabad High Court on Wednesday, 25 April.

Dr. Kafeel was arrested in connection with the death of over 30 infants due to lack of oxygen in BRD hospital in August last year and has been lodged in a Gorakhpur jail since September 2, 2017.

Justice Yashwant Verma granting bail said since the chargesheet has already been filed in the case there was no need of custody, Live Law website reported.

Dr Khan had been booked under Sections 120-B, 308 and 409 of the IPC.

Recently, Khan had penned a gut-wrenching letter while in jail, describing what happened at Gorakhpur hospital.

He also claimed that he had been made a ‘scapegoat’ for an administrative failure.

“The moment I got that WhatsApp message on that fateful 10 August 2017 night, I did everything a doctor, a father, a responsible citizen of India would/should do. I tried to save each and every life which was in danger due to sudden stoppage of liquid oxygen. ”

“Sometime, I ask myself, “Am I really guilty?” And the answer pops out from the core of my heart – a big NO,” he wrote in the letter.

“Yogiji was angry because – how this incident came into the media. I swear to my Allah, I did not inform any media person that night. They were already there that night itself.”

Delhi High Court issued notices to JNU authorities, Prof Atul Johri & Delhi police on the plea of some female students

Delhi High Court issued notices to JNU authorities, Prof Atul Johri & Delhi police on the plea of some female students seeking the suspension of Professor Atul Johri and also declaration that he cannot enter university premises. Court sought reply of all respondents till 2nd May.