Daily Archive: January 12, 2018

Post Martem of 4 SC JUDGES REVOLT

जो बात भारत की जनता को पहले मालूम थी वह आज खुद सर्वोच्च न्यायलय के 4 न्यायाधीशों ने बंगले में बैठ कर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और भी स्पष्ट कर दिया है। यह घटना भारतीय न्यायिक व संवैधानिक इतिहास का एक ऐसा बदनुमा दाग है जो कभी भी न्यायाधीशों के कपाल से मिटने वाला नही है। जिन 4 न्यायधीशों ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ विद्रोह किया है उनके नाम है जस्टिस जे चेलमेस्वर जस्टिस कुरियन जोसफ, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस मैदान लोकुर।

यदि कोई यह समझ रहा है कि इन 4 न्यायाधीशों ने सामने आकर भारत की जनता की बहुत भलाई की है और वे सत्यवादी है तो यह बड़ी भूल होगी। यह विद्रोह इस लिये हुआ ताकि सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक शक्ति को कमजोर किया जा सके और जनता में यह भ्रम बनाया जासके ताकि सर्वोच्च न्यायालय की कलम से , भविष्य में निकलने वाले निर्णयों की नैतिकता समाप्त हो सके। यह सभी चार न्यायाधीश कांग्रेस द्वारा भारत मे पिछले चार दशकों से स्थापित भ्रष्ट इको सिस्टम की पैदाइश है और आज भी इनकी श्रद्धा व निष्ठा, भारत के संविधान या राष्ट्र के प्रति न होकर कांग्रेस के गांधी परिवार प्रति है।

आज जिस तरह से भ्रष्ट, दलाल व सोनिया गांधी के परिवार के चरनभाट पत्रकार शेखर गुप्ता, इन चारों न्यायधीशों को लेकर पत्रकारों के बीच लेकर पहुंचा था उससे यह स्पष्ट है कि यह प्रेस कांफ्रेस, भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं व संवैधानिक संस्थाओं को तोड़ने के उद्देश्य से किया गया है। न्यायधीशों ने कांफ्रेंस और अपने लिखे पत्र से यही दिखाने का प्रयत्न किया है कि सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के आने के बाद से ही सर्वोच्च न्यायालय के तन्त्र में खराबी आयी है लेकिन जनता यह जानती है कि यह तन्त्र तो पिछले कई दशकों से दीमक रूपी न्यायाधीशों ने खोखला किया हुआ है।

यहां यह महत्वपूर्ण है कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा पर आक्रमण दो कारणों से हुआ है। पहला यह कि जस्टिस मिश्रा ने 1984 के सिख दंगो के केस फिर से खोले जाने का निर्णय लिया है जो कांग्रेस को बिल्कुल पसंद नही आरहा है और दूसरा यह कि वे रामजन्म भूमि के मुकदमे को देख रहे है। यह सारी कवायत इसी लिये है ताकि जस्टिस मिश्र दबाव में आकर राम जन्म भूमि के मुकदमे को आगे बढ़ा दे और यदि वह निर्णय देते है, जो कि हिंदुओं के पक्ष में ही आने की संभावना है तो इस तरह के किसी भी निर्णय को संदिग्ध बताया जाये और इस निर्णय को वर्तमान की मोदी सरकार के दबाव में लिया गया निर्णय करार दिया जासके।

भारत का न्यायालय व उसके न्यायाधीश सड़ चुके है। वे आज उतने ही बईमान व राष्ट्रद्रोही नज़र आरहे है जितना भारत की मीडिया का एक वर्ग है। जिस तरह से भारत की मीडिया का एक वर्ग निर्लज्जता से हिंदुत्व व राष्ट्रवाद के विरुद्ध पक्षपात पूर्ण खबरों को बनाता व बिगाड़ता है वैसे ही न्यायाधीश भी निर्लज्जता से न्याय को बना और बिगाड़ रहे है। आज भारत के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश केहर ने जिस तरह भारत के बढ़ने में हिंदुत्व को सबसे बड़ा रोड़ा बोला है वह इन चार न्यायाधीशों के विद्रोह का ही हिस्सा है।

ये लोग न्यायाधीश न होकर कांग्रेस वामी सेक्युलर गिरोह के ही हिस्से है। मैं जानता हूँ कि इस विद्रोह ने एक संवैधानिक संकट खड़ा कर दिया है और मोदी सरकार को मिली अब तक कि सबसे बड़ी चुनौती भी है। लेकिन इस संकट का एक ही इलाज है कि जैसे न्यायाधीश सड़क पर आगये है वैसे ही सभी राष्ट्रवादी शक्तियों को सुचित्ता व मर्यादा का त्याग कर के इस गिरोहबंदी के विरुद्ध सड़क पर आना चाहिये।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से सिर्फ एक बात कहनी है और वह यह कि यदि भारत और उसके लोकतंत्र को बचाना है तो आपके पास राष्ट्र के लिये आज तानाशाह बनने का अवसर है। जनता तानाशाही ही चाह रही है।

#pushkerawasthi

Telangana Board of Intermediate Education Releases Class 12 Exam 2018 Date Sheet

Telangana, Jan 12: The Telangana State Board of Intermediate Education (TSBIE) on Friday released the date sheet of class 12 board exams 2018 on its official website bie.telangana.gov.in. The board exams for Intermediate first year and second-year students will begin from February 28, 2018.

The board exams will begin from 9 AM and continue until 12 noon.

Here’s the complete date sheet PDF: Intermediate Public Examinations Timetable

INTERMEDIATE PUBLIC EXAMINATIONS TIMETABLE

Exam time: 9:00 AM to 12:00 Noon

date sheet

The practical examinations will be conducted from February 1 to February 21, 2018. The practical exams will be conducted on Sundays as well in two sessions. The morning session will be conducted from 9 AM to 12 noon and the evening session will be conducted from 2 PM to 5 PM.

‘Democracy in Danger’, Says Congress on SC Judges’ Press Conference

New Delhi, Jan 12: The Congress party on Friday said it was “very concerned” about the matter of four senior Supreme Court judges going public with complaints against the functioning of the Supreme Court. In a tweet, the Congress party said the development implies “democracy was in danger”.

“We are very concerned to hear 4 judges of the Supreme Court expressed concerns about the functioning of the Supreme Court. #DemocracyInDanger,” the Congress made a post on its official Twitter handle. Senior lawyer and Congress leader Kapil Sibal will meet party president Rahul Gandhi over the press conference by four Supreme Court judges.

In an unprecedented press conference earlier on Friday, the four judges- Justices Madan B Lokur, Kurien Joseph, Ranjan Gogoi and J Chelameswar– said that “things are not in order” at the Supreme Court. Addressing the media, the senior-most judges launched a sharp attack on Chief Justice of India Dipak Misra for “ignoring the concerns voiced by them”.

“Administration of the Supreme Court is not in order. Many things less than desirable have happened in the last few months. We owe a responsibility to the institution and the nation. We tried to collectively persuade the Chief Justice that certain things are not in order and remedial measures are necessary. Unfortunately, our efforts have failed in convincing the Chief Justice of India to take steps to protect this institution,” Justice Chelameswar said

The four judges did not refer to any particular matter the Chief Justice had decided in assigning benches. Asked specifically if they were upset over reference of the matter seeking a probe into the suspicious death of Special CBI Judge Brijgopal Harkishan Loya, Justice Gogoi said: “Yes.” But in the seven-page letter, they said they were not mentioning details only to avoid embarrassing the institution because “such departures have already damaged the images of this institution to some extent”.

Justice Chelameswar told the media that they were “convinced that unless this institution is protected and maintain its requirements, democracy will not survive in the country or any country. “For the survival of a democracy, it is said… the hallmark of a democracy is independent and impartial judges.” Justice Gogoi said they were “discharging debt to the nation that has got us here”.

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, SC पर लगाए गंभीर आरोप

नई दिल्ली| भारतीय न्यायिक इतिहास में एक अभूतपूर्व और असाधारण घटना के तहत सुप्रीम कोर्ट के चार सेवारत न्यायाधीशों ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन किया और आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक व्यवस्था ठीक नहीं है. सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठता के आधार पर दूसरे नंबर के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर के आवास पर जल्दबाजी में बुलाए गए संवाददाता सम्मेलन में न्यायाधीशों ने कहा कि यह भारतीय न्याय व्यवस्था, खासकर देश के इतिहास और यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय के लिए एक असाधारण घटना है. हमें इसमें कोई खुशी नहीं है जो हम यह कदम उठाने पर मजबूर हुए हैं.

उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय की प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है. पिछले कुछ महीनों में ऐसा बहुत कुछ हुआ है, जो नहीं होना चाहिए था. देश और संस्थान के प्रति हमारी जिम्मेदारी है. हमने प्रधान न्यायाधीश को संयुक्त रूप से समझाने की कोशिश की कि कुछ चीजें ठीक नहीं हैं और तत्काल उपचार की आवश्यकता है.”

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, “दुर्भाग्यवश इस संस्थान को बचाने के कदम उठाने के लिए भारत के प्रधान न्यायाधीश को राजी करने की हमारी कोशिश विफल साबित हुई है.” न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर की मौजूदगी में न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा कि हम चारों इस बात से सहमत हैं कि “लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए निष्पक्ष न्यायाधीश और न्याय प्रणाली की जरूरत है.”

उन्होंने कहा, “हम चारों इस बात से सहमत हैं कि जबतक इस संस्थान को इसकी आवश्यकताओं के अनुरूप बचाया और बनाए नहीं रखा जाएगा, इस देश का लोकतंत्र या किसी भी देश का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता. किसी लोकतंत्र को जिंदा रखने के लिए, ऐसा कहा गया है.. किसी लोकतंत्र की कसौटी स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायाधीश होते हैं.”

न्यायमूर्ति चेलेमेश्वर ने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वे लोग किस चीज से नाराज हैं. लेकिन उन्होंने कहा कि मीडिया में बहुत सारी चीजें लिखी जा चुकी हैं और यह कोई राजनीति विवाद नहीं है.

उन्होंने कहा, “चूंकि हमारे सभी प्रयास विफल हो गए. यहां तक कि आज सुबह भी एक खास मुद्दे पर हम चारों एक खास अनुरोध के लिए प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात करने गए. दुर्भाग्यवश हम उन्हें नहीं समझा नहीं सके. इसके बाद इस संस्थान बचाने का इस देश से आग्रह करने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं रह गया.”

उन्होंने कहा, “हमने ढेर सारे बुद्धिमानों को इस बारे में बातें करते सुना है, लेकिन मैं नहीं चाहता कि कुछ बुद्धिमान आज के 20 वर्ष बाद हमसे भी कहें कि हम चारों न्यायाधीशों ने संस्थान और देश की हिफाजत करने के बदले अपनी आत्मा को बेच दिया. हमने इसे जनता के समक्ष रख दिया है. हम यही कहना चाहते थे.”

आखिर वास्तव में मुद्दा क्या है? न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, “कुछ महीने पहले, हम चारों वरिष्ठ न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश को एक हस्ताक्षरित पत्र लिखा था. हम एक विशेष चीज के बारे में चाहते थे कि उसे विशेष तरीके से किया जाए. यह हुआ, लेकिन इससे कई सवाल भी खड़े हुए. न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा वे लोग देश के प्रति अपना कर्ज उतार रहे हैं.