Daily Archive: October 31, 2017

7th Pay Commission: NAC Asked to Keep Govt Employees Happy, Avoid Job Loss

New Delhi, Oct 31: The National Anomaly Committee (NAC), which was formed to resolve all matters related to the anomalies in the implementation of the 7th Pay Commission‘s recommendations, was expected to hold a key meeting in this month regarding hike in minimum pay. Though the NAC is yet to submit its report on minimum pay hike, it has been asked to keep several issues in mind before suggesting raise beyond the recommendation of the 7th Pay Commission or 7th CPC.

The NAC has been asked to keep central government employees happy while suggesting a hike in minimum pay, recommended by the 7th Pay Commission and approved by the Cabinet, said a report. The government has also asked the NAC to take a decision that will not cause job loss. The NAC has been advised to also keep in mind what is affordable to the government while proposing a hike in minimum pay beyond the recommendation of the 7th Pay Commission.

The NAC meeting which was scheduled for October was postponed. If media reports are to be believed, the meeting is likely to take place only after the elections in Gujarat and Himachal Pradesh are complete. The result of Himachal Pradesh and Gujarat will be declared on December 18.

The NAC may suggest hiking minimum pay to Rs 21,000 from Rs 18,000. Fitment factor will be raised to 3.00 times from the existing 2.57 times. The Cabinet is likely to take up the pay hike over the recommendations of the 7th Pay Commission for the central government employees by the end of January.

Meanwhile, the central government employees reiterated their demand of higher minimum pay with fitment factor 3.68. The employees welcomed the proposal of raising minimum pay beyond the recommendation of the 7th Pay Commission but asked to hike fitment factor as well.

The 7th Pay Commission raised minimum pay from Rs 7,000 to Rs 18,000 per month and fitment factor to 2.57 times, which was approved by the Cabinet on June 28 last year. However, the central government employees expressed dissatisfaction and have been demanding to raise minimum pay from Rs 18,000 to Rs 26,000 and fitment factor 3.68 times from 2.57 times.

लता मंगेशकर ने खोला इंदिरा गाँधी का ये बड़ा राज, कहा..

सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 33वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि संगीत में न केवल उनकी गहरी दिलचस्पी थी, बल्कि वह एक अच्छी गायिका भी थीं. लता ने ट्वीट किया, “आज भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि है. मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं.” उन्होंने इंदिरा गांधी के साथ अपनी पुरानी तस्वीर भी साझा की.

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भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी की आज पुण्यतिथि है.मेरी उनको भावपूर्ण श्रद्धांजली.

उन्होंने लिखा, “उनके साथ खूबसूरत संबंध था, उन्हें संगीत में बेहद दिलचस्पी थी और मैंने सुना है कि वह खुद भी अच्छी गायिका थीं.”

फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का गेट नंबर 2 सहवाग के नाम पर रखा, उदघाटन करने खुद पहुंचे

नयी दिल्ली| अपने जमाने के दिग्गज सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने फिरोजशाह कोटला के गेट नंबर दो का नामकरण उनके नाम पर किये जाने को सकारात्मक कदम करार देते हुए उम्मीद जतायी कि दिल्ली में भविष्य में अन्य खिलाड़ियों के नाम पर भी स्टैंड का नामकरण किया जाएगा. सहवाग दिल्ली के पहले क्रिकेटर हैं जिनके नाम पर कोटला के किसी गेट का नामकरण किया गया है. अब गेट नंबर दो उनके नाम से जाना जाएगा और इस आक्रामक बल्लेबाज ने अपने कई पूर्व साथियों की मौजूदगी में स्वयं उसका उदघाटन किया.

सहवाग ने इस अवसर पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘ मुझे बड़ी खुशी है कि दिल्ली में एक अच्छी शुरूआत हुई है और मेरे नाम से गेट का नाम रखा गया है. हो सकता है कि आने वाले समय में अन्य खिलाड़ियों के नाम से अन्य स्टैंड, गेट और यहां तक कि ड्रेसिंग रूम के भी नाम रखे जाएं. डीडीसीए का य़ह सकारात्मक कदम है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने आग्रह किया था कि यह समारोह (श्रीलंका के खिलाफ होने वाले) टेस्ट मैच से पहले आयोजित किया जाए लेकिन तब कोई और समारोह होना है. इसलिए आपको आगे भी ऐसे समारोह देखने को मिलेंगे.’’ सहवाग ने घरेलू क्रिकेट में अपना अधिकतर समय दिल्ली के साथ बिताया था लेकिन उन्हें अफसोस है कि वह कभी रणजी ट्राफी चैंपियन टीम का हिस्सा नहीं बन पाये. दिल्ली जब 2007-08 में रणजी चैंपियन बनी तब सहवाग भारतीय टीम के साथ आस्ट्रेलिया दौरे पर थे.

इस मौके पर पूर्व क्रिकेटर मदनलाल, यशपाल शर्मा, चेतन शर्मा, राहुल संघवी, संजीव शर्मा, गुरशरण सिंह, अतुल वासन, सबा करीम, हरि गिडवानी, सुनील वालसन, आकाश लाल, रजत भाटिया, राजू शर्मा तथा सहवाग के पहले कोच एएन शर्मा भी उपस्थित थे. सहवाग ने कहा, ‘‘ मेरी दिली तमन्ना थी कि जब भी ऐसा कोई समारोह हो तो हम उन सब क्रिकेटरों को बुलाये जिनका दिल्ली और देश की क्रिकेट में अहम योगदान रहा है. मुझे बहुत खुशी वे सब खिलाड़ी आज यहां पर मौजूद थे. इन सभी दोस्तों से इस गेट पर मिलकर बहुत अच्छा लगा. उम्मीद है कि इन खिलाड़ियों के नाम पर भी कुछ चीजों का नाम रखा जाएगा.’’

उन्होंने कहा, ‘‘केवल वही साथी नहीं आ पाए जो दिल्ली में नहीं थे. मोहिंदर अमरनाथ, बिशन सिंह बेदी नहीं आ पाए लेकिन उनकी उम्र भी है और मैं उनके नहीं आने के कारण समझ सकता हूं. बेदी साहब रणजी ट्राफी में मेरे पहले कोच भी थे और उन्होंने मुझे काफी प्रेरित किया. जिम्मी पा से भी बल्लेबाजी के काफी टिप्स मैंने लिये थे.’’

टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले सहवाग ने कहा कि इससे युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी. उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी युवा खिलाड़ी इससे स्वत: ही प्रेरित होगा क्योंकि इससे उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी कि अगर वह अच्छा प्रदर्शन करता है तो उसके नाम पर भी कभी गेट हो सकता है.’’ सहवाग को थोड़ी निराशा भी है कि उनकी मां और पत्नी इस मौके उपस्थित नहीं हो पायी. उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस मौके पर अपनी मां और पत्नी की कमी महसूस की. मां बीमार थी और इसलिए वह दोनों नहीं आ पायी लेकिन मेरे दोनों बेटे आये हैं. वे इस खास मौके का हिस्सा बनना चाहते थे.

Text of PM’s Speech at Run for Unity on Sardar Patel’s 142nd Birth Anniversary

भारत माता की जय

सरदार साहब अमर रहें, अमर रहें

विशाल संख्‍या में पधारे हुए महाभारती के प्‍यारे लाडले सभी युवा साथी आज 31 अक्‍टूबर सरदार वल्‍लभ भाई की जन्‍म जयन्‍ती है। आज 31 अक्‍टूबर भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा जी की पुण्‍य तिथि भी है। आज पूरे देश में सरदार साहब की जन्‍म जयन्‍ती को स्‍मरण करते हुए उस महापुरूष ने देश की आजादी के लिए जिस प्रकार से अपना जीवन खपा दिया। उस महापुरूष ने देश के आजादी के बाद की संकट की घड़ियों से, बिखराव के वातावरण से, आंतरिक संघर्ष की चरम सीमा के बीच अपने कौशल्‍य के द्वारा, अपनी दृढ़ शक्ति के द्वारा, अपनी सर्वोत्र भारत भक्ति के द्वारा उन्‍होंने देश को न सिर्फ आजादी के समय पैदा हुए संकटों से बचाया बल्कि उन्‍होंने सैंकड़ों राजे-रजवाड़े जो अंग्रेजों का इरादा था‍ कि अंग्रेज जाने के बाद ये देश बिखर जाए। छोटी-छोटी रियासतों में बंट जाए। भारत का नामो-निशान न रहे, ये सरदार वल्‍लभ भाई पटेल का संकल्‍प बलखा। ये सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की दीर्घ दृष्टि थी कि उन्‍होंने साम, दाम, दंड भेद हर प्रकार की नीति, कूटनीति, रणनीति उसका उपयोग करते हुए बहुत ही कम समय में देश को एकता के सूत्र में बाँध दिया। सरदार वल्‍लभ भाई पटेल शायद हमारे देश की नई पीढ़ी को उनसे परिचित ही नहीं करवाया गया| एक प्रकार से इतिहास के झरोखे से इस महापुरूष के नाम को या तो मिटा देने का प्रयास हुआ या तो उसको छोटा करने का प्रयास हुआ था। लेकिन इतिहास गवाह है कि सरदार साहब, सरदार साहब थे कोई शासन उनको स्‍वीकृति दे या न दे, कोई राजनीतिक दल उनके महात्‍मय को स्‍वीकार करे या न करे लेकिन यह देश इस देश की युवा पीढ़ी भी एक पल के लिए भी सरदार साहब को भूलने के लिए तैयार नहीं है, इतिहास से ओझल होने देने के लिए तैयार नहीं है और इसी का परिणाम है कि जब देश ने हमें सेवा करने का मौका दिया तो हमने देश के सामने सरदार पटेल की जयन्‍ती को एक विशेष रूप से मना करके उस महापुरूष के उस उत्‍तम कार्यों का पीढ़ी दर पीढ़ी तक स्‍मरण रहे और इसीलिए Run for Unity एकता के लिए दौड़ उस अभियान को हम चला रहे हैं और मुझे खुशी है कि देश की युवा पीढ़ी बढ़ चढ़ करके एकता की इस दौड़ में हिस्‍सा ले रही है।

एक बार हमारे देश के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉक्‍टर राजेन्‍द्र बाबू ने कहा था और उनके शब्‍द हम सबको सोचने के लिए मजबूर करते हैं। देश के प्रथम राष्‍ट्रपति राजेन्‍द्र बाबू ने कहा था आज सोचने और बोलने के लिए हमे भारत का नाम, भारत नाम का देश उपलब्‍ध है… यह सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की statesmanship और प्रशासन पर उनकी जबरदस्‍त पकड़ के कारण संभव हो पाया है और आगे कहा है कि और ऐसा होने के बावजूद हम बहुत ही जल्‍द सरदार साहब को भूल बैठे हैं। राजेन्‍द्र बाबू भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति ने सरदार साहब को भुला देने के संबंध में ये पीड़ा व्‍यक्‍त की थी। आज सरदार साहब की 31 अक्‍टूबर को एकता की दौड़ के साथ जन्‍म जयन्‍ती मना रहे है तब राजेन्‍द्र बाबू की आत्‍मा जहां भी होगी उनको जरूर संतोष होता होगा कि भले कुछ लोगों ने सरदार साहब को भुलाने का भरसक प्रयास किया होगा लेकिन सरदार साहब इस देश की आत्‍मा में विराजमान हैं। वो फिर से एक बार हमारे सामने इन युवा संकल्‍प के साथ फिर से उभर करके आए हैं और हमें नई प्ररेणा दे रहे हैं।

भारत विविधताओं से भरा हुआ देश है विविधता में एकता हमारे देश की विशेषता ये मंत्र हम बोलते आएं हैं, गूंजता रहता है लेकिन जब तक उस विविधता को हम सम्‍मान नहीं देंगे। हमारी विविधता के प्रति गर्व नहीं करेंगे हमारी विविधता में एकता के सामर्थ्‍य के साथ हम अपने आपको आत्‍मिक रूप से जोड़गे नहीं तो विविधता शायद शब्‍दों में हमें काम आएगी। लेकिन राष्‍ट्र के भव्‍य निर्माण के लिए हम उसका उतना उपयोग नहीं कर पाएगें। हर भारतवासी इस बात के लिए गर्व कर सकता है कि विश्‍व की और हम ये बड़े नाज के साथ कह सकते है विश्‍व की हर पंथ, हर परंपरा हर आचार-विचार उसको किसी न किसी रूप में ये भारत अपने में समेटे हुए हैं। बोलियां अनेक है, पहनावा अनेक है, खानपान के तरीके अनेक हैं, मान्‍यताएं भिन्‍न हैं दृढ़ हैं उसके बावजूद भी देश के लिए एक रहना देश के लिए नेक रहना ये हमने हमारी सांस्‍कृतिक विरासत से सीखा है। आज दुनिया में एक ही पंथ और परंपरा से पले बढ़े लोग भी एक-दूसरे को जिंदा देखने को तैयार नहीं है। एक-दूसरे को मौत के घाट उतारने के लिए तुले हुए हैं। दुनिया को हिंसा की गर्त में डुबोकर के अपनी मान्‍यताओं का प्रभाव बढ़ाने में आज 21वीं सदी में कुछ मानव लगे हुए हैं। ऐसे समय हिन्‍दुस्‍तान गर्व के साथ कह सकता है। कि हम वो देश हैं, हम वो हिन्‍दुस्‍तानवासी हैं जो दुनिया की हर मान्‍यताओं को, परंपराओं को, पथ को अपने भीतर समेट करके एकता के सूत्र में बंधे हुए हैं। ये हमारी विरासत है, ये हमारी ताकत है। ये हमारे उज्‍ज्‍वल भविष्‍य का मार्ग है और हम लोगों का दायित्‍व बनता है भाई और बहन के प्‍यार को कोई कम नहीं आंकता है। भाई और बहन के लिए एक-दूसरे के लिए त्‍याग करना ये सहज प्रकृति प्रवृत्ति होती है उसके बावजूद भी उस संस्‍कार सरिता को बढ़ाने के लिए हम रक्षा-बंधन का पर्व मनाते हैं। भाई और बहन के रिश्‍तों को हर वर्ष संस्‍कारित करने का प्रयास करते हैं। वैसे ही देश की एकता देश की सांस्‍कृतिक विरासत ये सामर्थ्‍यवान होने के बावजूद भी हर बार हमें उसको पुन: संस्‍कारित करना जरूरी होता है। बार-बार एकता के मंत्र को याद करना आवश्‍यक होता है। बार-बार एकता के लिए जीने का संकल्‍प जरूरी होता है।

देश विशाल है, पीढियां बदलती रहती हैं। इतिहास की हर घटना का पता नहीं होता है। तब भारत जैसे विविधता भरे जैसे देश में हर पल एकता की मंत्र को गूंजते रखना, हर पल एकता के रास्‍ते खोजते रहना, हर पल एकता को मजबूत करने के तरीकों से जुड़ते रहना ये भारत जैसे देश के लिए अनिवार्य है। हमारा देश एक रहे, अखंड रहे …सरदार साहब ने हमें जो देश दिया है, उसकी एकता और अखंडता सवा सौ करोड़ देशवासियों का दायित्‍व है। सवा सौ करोड़ देशवासियों की जिम्‍मेवारी है और इसलिए सरदार पटेल को हम उनका पुण्‍य स्‍मरण देश की एकता के लिए उन्‍होंने जो भगीरथ कार्य किया है। उसके साथ जोड़ करके करना चाहिए। कैसे उन्होंने देश को एक किया। हर पीढ़ी को पता होना चाहिए और उसी बात को लेकर के आज 31 अक्‍टूबर सरदार साहब की जन्‍म जयन्‍ती हम मना रहे हैं। आठ साल के बाद सरदार साहब की जयन्‍ती के 150 साल होंगे। जब सरदार साहब की जयन्‍ती के 150 साल होंगे तब हम देश को एकता की वो कौन सी नई मिसाल देंगे। जन-जन के भीतर एकता के इस भाव को किस प्रकार से प्रबल करेंगे। उन संकल्‍पों को लेकर के हमें चलना होगा।

2022 आजादी के 75 साल हो रहे हैं। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू, नेता जी सुभाष चंद्र बोस, महात्‍मा गांधी, सरदार पटेल अनगिनत देशभक्‍त, अनगिनत लक्षावधि देशभक्‍त, देश के लिए जीए, देश के लिए मरे। 2022 आजादी के 75 साल हो हम भी एक संकल्‍प को हृदय में तय करे उस संकल्‍प को सिद्ध करने के लिए हम जुट जाएं। हर हिन्‍दुस्‍तानी का कोई संकल्‍प होना चाहिए। हर हिन्‍दुस्‍तानी को संकल्‍प को साकार करने के‍ लिए भरसक प्रयास करना चाहिए। और वो संकल्‍प जो समाज की भलाई के लिए है। वो संकल्‍प जो देश के कल्‍याण के लिए है। वो संकल्‍प जो देश की गरिमा को ऊपर करने वाला हो। उस प्रकार के संकल्‍प से हम अपने आप को जोड़े आज भारत की आजादी के वीर सुपुत्र सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की जन्‍म जयन्‍ती पर 2022 के लिए भी हम संकल्‍प करें ये मैं समझता हूं समय की मांग है।

आप इतनी बड़ी विशाल संख्‍या में आए। उमंग और उत्‍साह के साथ इसमें शरीक हुए। देश भर में भी नौजवान जुड़े हुए हैं। मैं आप सबको राष्‍ट्रीय एकता दिवस पर शपथ के लिए निमंत्रित करता हूं। हम सब सरदार वल्‍लभ भाई पटेल का पुण्‍य स्‍मरण करते हुए, मैं जो शपथ आपके सामने प्रस्‍तुत करता हूं आप उसको दोहराएंगे और सिर्फ वाणी से नहीं मन में संकल्‍प धारण करेंगे। इस भाव के साथ उसको दोहराएंगे आप सब अपना दाहिना हाथ आगे करके मेरी इस बात को दोहराएंगे। मैं सत्‍य निष्‍ठा से शपथ लेता हूं कि मैं राष्‍ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए स्‍वंय को समर्पित करूंगा और अपने देशवासियों के बीच यह संदेश फैलाने का भी भरसक प्रयत्‍न करूंगा। मैं यह शपथ अपने देश की एकता की भावना से ले रहा हूं। जिसे सरदार वल्‍लभ भाई पटेल की दूरदर्शिता एवं कार्यों द्वारा संभव बनाया जा सका। मैं अपने देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपना योगदान करने का भी सत्‍य निष्‍ठा से संकल्‍प करता हूं।

भारत माता की जय

भारत माता की जय

भारत माता की जय

बहुत-बहुत धन्‍यवाद

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अतुल तिवारी, हिमांशु सिंह, ममता 
(Release ID :172069)