Daily Archive: October 12, 2017

7th Pay Commission: Modi Government Wants to Increase Basic Pay of Central Government Employees

New Delhi, Oct 12: It can prove to be a good news for the Central government employees as the Ministry of Finance has mooted a proposal to raise the basic salary of central government employees beyond 7th Pay Commission. According to a report, the Modi government wants to raise the minimum pay from Rs 18,000 to Rs 21,000. The government wants to lift basic pay to fitment factor 3.00 times from 2.57 times.

The proposal to increase the salary is likely to be passed by the National Anamoly Committee (NAC) meeting later in October. A ministry official told the Sen Times that the notion that this increase would have a negative impact on the exchequer was nonsense. The report further said that the government was highly profitable as the crude prices have halved, but the petrol and diesel are still selling at Rs 72 and Rs 60 per litre respectively. (Also read: 7th Pay Commission: What Will be The Revised CPC Pay For Teachers)

Modi government had approved the recommendations of the 7th Pat Commission last year, making the minimum basic pay from Rs 7,000 to Rs 18,000 month. The maximum pay decided was from Rs 80,000 to Rs 2.5 lakh.

On Wednesday, the Union Cabinet approved the revision of pays for teachers and academic staff in universities, colleges and other centrally-funded institutions. The decision will directly benefit 7.58 lakh teachers and staff in the 106 universities and colleges funded by the UGG; 329 universities funded by state governments and around 12,912 aided college teachers. (Also read: 7.5 Lakh Teachers to Get Benefits of Seventh Pay Commission Recommendations)

According to a government release, the implementation of this pay revision will enhance the teachers’ pay in the range of Rs. 10,400 and Rs. 49,800 as against the extant entry pay due to the implementation of the 6th Central Pay Commission for the pay of teachers. This revision would register an entry pay growth in the range of 22% to 28 %.

Land pooling policy:DDA’s role limited to facilitator, planner

New Delhi, Oct 12 (PTI) Delhi Lt Governor Anil Baijal and Union Urban Development Minister Hardeep Puri today decided to simplify the land pooling policy for the national capital by limiting DDA’s role to being a facilitator and planner only.

This effectively means the transfer of pooled land to the DDA will not be required.

Originally, the land pooled under the policy was to be transferred to the DDA, which would act as the developer entity and undertake further sectoral planning and development of infrastructure on the land pooled.

“The minister and the L-G decided to do away with this requirement and land title continues to be with the original land owners,” the Urban Development ministry said in a statement here after the meeting between Baijal and Puri.

“Delhi Development Authority will now act more as a facilitator and planner as against the role initially envisaged for it as a part of simplification of execution of land pooling policy,” it said.

Land pooling is expected to catalyse economic, social and civic development of the national capital besides triggering substantial investments and employment generation.

The policy provides for infrastructure development on the pooled land and returning fixed percentage of it to the owners. It is expected to benefit 95 lakh people by incentivising dense development for effective utilisation of land in the national capital, the statement read.

The two, however, expressed concern over the “delay” in implementing the policy that is expected to boost development of 22,000 hectares of land.

The ministry said that the DDA was asked to initiate spatial and services planning for the five zones covered under the policy “so that it could be given immediate effect after finalisation of regulations under the policy.” The DDA was directed to formulate necessary regulations under the policy in accordance with the changes in a month.

“DDA was also asked to ensure single-window clearance mechanism for according necessary approvals for speedy implementation of the policy,” the statement said.

Under the policy, 89 villages have been declared as urban areas under the Delhi Municipal Act, 1957 and 95 villages as Development Areas, as required for the implementation of land pooling.

एमपी: कॉलेज में सिंधिया को बुलाने पर दलित प्राचार्य निलंबित, मामला गरमाया

भोपाल. मध्यप्रदेश में अशोकनगर जिले के मुंगावली स्थित शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य बी.एल.अहिरवार को महज इसलिए निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने कालेज के कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को बुला लिया था. क्षेत्रीय सांसद को क्षेत्र के कॉलेजों में जाने का पूरा हक है और कॉलेजों के कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट या मुख्य अतिथि बुलाए जाने का हमेशा से रिवाज रहा है, लेकिन प्रदेश की भाजपा सरकार को सिंधिया का कॉलेज के कार्यक्रम में जाना पसंद नहीं है, क्योंकि वह सांसद तो हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता हैं.

क्षेत्रीय सांसद को कार्यक्रम में बुलाने वाले प्राचार्य अहिरवार के निलंबन के आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि ‘उन पर यह कार्रवाई कांग्रेस नेताओं के आने पर की गई है. अहिरवार ने गुरुवार को कहा, सिंधिया महाविद्यालय के छात्रों से संवाद करना चाहते थे. वे क्षेत्रीय सांसद हैं, उन्हें नियमों के मुताबिक बुलाया जा सकता था, लिहाजा बुलाया गया. उन्होंने मंगलवार को छात्रों से संवाद किया. अगले ही दिन मेरे निलंबन का आदेश आ गया.

Private Schools – Black day

निजी स्कूलों में मनाया ‘ब्लैक डे’, काली पट्टी बांध किया काम

– सरकार व शिक्षा विभाग पर स्कूलों के साथ भेदभाव का आरोप, प्रधानमंत्री व राज्य के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख मामले से कराया अवगत

– देशभर के 60,000 से अधिक स्कूलों के शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से दर्ज कराया विरोध

नई दिल्ली। स्कूल संचालन और प्रबंधन के कार्य में दिन प्रतिदिन बढ़ते सरकारी हस्तक्षेप, नए-नए नियम कानूनों के नाम पर होने वाले भेदभाव, स्कूल संचालकों व कर्मचारियों के शोषण व बढ़ते इंस्पेक्टर राज के खिलाफ देशभर के स्कूलों का गुस्सा आखिरकार गुरुवार को छलक उठा। आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना से परेशान विभिन्न राज्यों के 60,000 से अधिक निजी स्कूल संचालकों, अध्यापकों और कर्मचारियों ने इसका विरोध बतौर ब्लैक डे, हाथों पर काली पट्टी बांध कर किया। इस दौरान प्रांतीय स्कूल संगठनों ने नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल्स अलायंस (निसा) के नेतृत्व में स्कूल बसों व स्कूल भवनों पर विरोधस्वरूप काले झंडे भी लहराए। स्कूल संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मानव संसाधन एवं विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, राज्य के मुख्यमंत्रियों व शिक्षामंत्रियों को मांगपत्र सौंपा और अपने साथ होने वाली ज्यादतियों से भी अवगत कराया और समस्या के समाधान की मांग की।

निसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने बताया कि शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) के तहत 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी सरकार की है। सरकार अपनी इस जिम्मेदारी से भाग रही है और इसे निजी स्कूलों पर थोप रही है। स्कूलों को 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों के ऐवज में प्रतिपूर्ति भी नहीं की जा रही है और आए दिन अनावश्यक रूप से नए नए नियम थोपे जा रहे हैं। कुलभूषण शर्मा ने कहा कि गुरुग्राम स्थित रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद छोटे व गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए ऐसे ऐसे नियम थोपे जा रहे हैं जो व्यवहारिक नहीं है। इस कारण, शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार और इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिल रहा है।

निसा के राष्ट्रीय संयोजक डा. अमित चंद्र ने बताया कि बहुप्रचारित शिक्षा का अधिकार कानून, तमाम अच्छे उद्देश्यों के बावजूद समाज को शैक्षणिक रूप से बांटने का सरकारी उपकरण बन कर रह गया है। यह सबको समान शिक्षा प्रदान करने की बजाए राजनैतिक मुद्दे के तौर पर ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे स्कूल संचालकों, शिक्षकों, कर्मचारियों, अभिभावकों, मीडिया व नागरिक संगठनों के मध्य विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। इसका ताजा उदाहरण फीस नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम हैं। अच्छा हो यदि सरकार स्कूलों की बजाए डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम के तहत छात्रों को सीधे फंड उपलब्ध कराए ताकि अभिभावक अपने बच्चों को मनपसंद स्कूल में भेज सकें और उनके साथ भेदभाव की संभावना समाप्त हो सके।

निसा पदाधिकारी एस. मधुसूदन ने बताया कि नीति निर्धारण के दौरान निजी स्कूलों के प्रतिनिधित्व की अनदेखी की जाती है। यही कारण हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में बनने वाले अधिकांश कानून पक्षपाती और अव्यहारिक होते हैं और इनका पालन करना छोटे व कम शुल्क वाले बजट स्कूलों के लिए संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों को विलेन के तौर पर प्रोजेक्ट किया जा रा है। हमारे यहां अधिकांश अध्यापिकाएं व प्रधानाचार्य महिला हैं और हाल ही में स्कूल सेफ्टी के नाम प्रधानाचार्यों को दंडित करने के फरमान से वे भयभीत हैं और वे पद से अपना इस्तिफा दे रही हैं।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें-

अविनाश चंद्र, avinash / 9999882477

Global Crude oil price of Indian Basket was US$ 55.07 per bbl on 11.10.2017

The international crude oil price of Indian Basket as computed/published today by Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) under the Ministry of Petroleum and Natural Gas was US$ 55.07 per barrel (bbl) on 11.10.2017. This was higher than the price of US$ 54.79 per bbl on previous publishing day of 10.10.2017.

In rupee terms, the price of Indian Basket increased to Rs. 3594.65 per bbl on 11.10.2017 as compared to Rs. 3576.02 per bbl on 10.10.2017. Rupee closed unchanged at Rs. 65.27 per US$ on 11.10.2017 as compared per US$ on 10.10.2017. The table below gives details in this regard:

Particulars Unit Price on October 11, 2017 (Previous trading day i.e. 10.10.2017)
Crude Oil (Indian Basket) ($/bbl)              55.07           (54.79)
(Rs/bbl)             3594.65       (3576.02)
Exchange Rate (Rs/$)              65.27          (65.27)

 

AD/MB Daily Crude Oil Price       

मिल चुका है धोखा… इस वजह से सपना चौधरी नहीं करती लड़कों पर भरोसा

 

सलमान खान का विवादित टीवी शो बिग बॉस हर साल की तरह इस साल भी ख़बरों में बना हुआ है. शो के मेकर्स ने इस साल भी चुन-चुन कर कंटेस्टेंट लाए हैं. शो की ख़ास बात ये है कि यहां कोई कितनी भी कोशिश क्यों ना कर ले. लेकिन उसका असली रूप सबके सामने आ ही जाता है और कुछ ऐसे सीक्रेट्स का खुलासा भी होता है जो शायद कोई ना जानता हो. इसी बीच बिग बॉस के घर की कंटेस्टटेंट सपना चौधरी को लेकर एक खुलासा हुआ है जिसे जानकार यक़ीनन लड़कों का दिल टूट जाएगा.

पिछले दिनों सपना ने शो से एलिमिनेट हो चुके कंटेस्टेंट प्रियांक शर्मा को अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ी कुछ बातें बताई. सपना के मुताबिक उनकी एक बहन है जिसकी दो बार शादी हो चुकी है. और उन लोगों को बहुत बड़ा धोखा मिला. सपना इसी वजह से लड़कों पर ज्यादा ऐतबार नहीं करती हैं. सपना ने आगे ये भी कहा कि वो अपनी मां के साथ रहती हैं और इसी वजह से उन्हें प्यार-मोहब्बत के लिए ज्यादा टाइम नहीं मिलता.

बता दें, सपना चौधरी एक स्टेज डांसर हैं. सपना हरियाणा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में भी खूब फेमस हैं. वो खुद भले ही यूट्यूब पर ना हो लेकिन उनके डांस वीडियो यूट्यूब पर खूब देखें जाते हैं. उनके एक-एक ठुमके पर लोग नोटों की बारिश कर देते हैं.